Friday, 23 June 2017

अकेलापन और एकांत

अकेलापन' इस संसार में सबसे बड़ी सज़ा है.!
और 'एकांत'
इस संसार में सबसे बड़ा वरदान.!!
ये दो समानार्थी दिखने वाले
शब्दों के अर्थ में
. आकाश पाताल का अंतर है।
अकेलेपन में छटपटाहट है
तो एकांत में आराम है।
अकेलेपन में घबराहट है
तो एकांत में शांति।
जब तक हमारी नज़र
बाहरकी ओर है तब तक हम.
अकेलापन महसूस करते हैं
और
जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ी
तो एकांत अनुभव होने लगता है।
ये जीवन और कुछ नहीं
वस्तुतः
अकेलेपन से एकांत की ओर
एक यात्रा ही है.!!
ऐसी यात्रा जिसमें
रास्ता भी हम हैं, राही भी हम हैं
और मंज़िल भी हम ही हैं.!!
🎇🎇 *शुभम मंगलम*

Friday, 26 May 2017

कृपया अपनी बेटियों को जरूर ऐसे संस्कार दे ...

बेटा-बहु
बेटा-बहु अपने बैडरूम में बातें कर रहे थे। द्वार खुला होने के कारण उनकी आवाजें बाहर कमरे में बैठी
माँ को भी सुनाई दे रहीं थीं।
बेटा-" अपने नौकरी के कारण हम माँ का ध्यान नहीं रख पाएँगे, उनकी देखभाल कौन करेगा ? क्यूँ ना, उन्हें वृद्धाश्रम में दाखिल करा दें, वहाँ उनकी देखभाल भी होगी और हम भी
कभी कभी उनसे मिलते रहेंगे।
बेटे की बात पर बहु ने जो कहा, उसे सुनकर माँ की आँखों में आँसू आ गए।
बहु--" पैसे कमाने के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है जी, लेकिन माँ का
आशीष जितना भी मिले, वो कम है। उनके लिए पैसों से ज्यादा हमारा संग-साथ जरूरी है। मैं अगर नौकरी ना करूँ तो कोई बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा।
मैं माँ के साथ रहूँगी
घर पर ट्यूशन पढ़ाऊँगी,
इससे माँ की देखभाल भी कर
पाऊँगी। याद करो, तुम्हारे बचपन में ही तुम्हारे पिता नहीं रहे और घरेलू काम धाम करके तुम्हारी माँ ने तुम्हारा पालन पोषण किया, तुम्हें पढ़ाया
लिखाया, काबिल बनाया।
तब उन्होंने कभी भी पड़ोसन के पास तक नहीं छोड़ा, कारण तुम्हारी देखभाल कोई दूसरा अच्छी तरह नहीं करेगा, और तुम आज ऐंसा बोल रहे हो। तुम कुछ भी कहो, लेकिन माँ हमारे ही पास रहेंगी, हमेशा अंत तक।
बहु की उपरोक्त बातें सुन, माँ रोने लगती है और रोती हुई ही, पूजा घर में पहुँचती है। ईश्वर के सामने खड़े होकर माँ उनका आभार मानती है
और उनसे कहती है--" भगवान, तुमने मुझे बेटी नहीं दी, इस वजह से
कितनी ही बार मैं तुम्हे भला बुरा
कहती रहती थी, लेकिन ऐंसी भाग्यलक्ष्मी देने के लिए तुम्हारा आभार मैं किस तरह मानूँ...?
ऐंसी बहु पाकर, मेरा तो जीवन सफल हो गया, प्रभु।
मित्रो यह कहानी आज के परिवेश में बहुत महत्व रखती है कि आखिर हमारी संस्कृति को हम क्या आयाम दे रहे हैं। कृपया अधिक से अधिक शेयर करके अपने दोस्तों को भी पढ़वाएं।
अपनी बेटियों को जरूर ऐसे संस्कार दे
Image may contain: 1 person, beard

Friday, 14 April 2017

अच्छे के साथ अच्छे बनें

अच्छे के साथ अच्छे बनें, 
पर  बुरे के  साथ बुरे नहीं।

                     *....क्योंकि -*
                           🔰
             *हीरे से हीरा तो तराशा जा* 
             *सकता है लेकिन कीचड़ से*
             *कीचड़  साफ  नहीं किया*
             *जा सकता ।*

Thursday, 13 April 2017

छोटी सी है ज़िंदगी बस,हर किसी से प्यार करो...

हर किसी के अन्दर अपनी
"ताकत"और अपनी"कमज़ोरी"
 होती है...
        "मछली"जंगल मे नही दौड*़ 
      *सकती और"शेर"पानी मे राजा*
*नही बन सकता.....!!*

                  *इसलिए*  
                *"अहमियत"*
            *सभी को देनी चाहिये....
  🌾🌿🌾🌿🌾✍​🌾🌿🌾
               *मन की आंखो से* 
              *प्रभु का दीदार करो*
             *दो पल का है अन्धेरा* 
        *बस सुबह का *इन्तजार करो*
                    *क्या रखा है*
           *आपस के बैर मे ए यारो*
           *छोटी सी है ज़िंदगी बस* 
             *हर किसी से प्यार करो...*              
                ¸.•*""*•.¸ 
                .........✍   


*वो रिश्ते बड़े प्यारे होते हैं*

*जिनमे न हक़ हो, न शक हो*
*न अपना हो, न पराया हो*

*न दूर हो , न पास हो*
*न जात हो, न ज़ज्बात हो*

*सिर्फ अपना पन का*       
*एहसास ही एहसास हो।*

    
⛴"पूरे  समुंद्र  का  पानी  भी एक  जहाज  को  नहीं डुबा  सकता,  जब  तक पानी को जहाज  अन्दर  न आने दे।🛳
             
इसी  तरह  दुनिया  का कोई  भी  नकारात्मक विचार  आपको  नीचे नहीं  गिरा  सकता,  जब तक  आप  उसे  अपने अंदर  आने  की  अनुमति  न  दें।"

                अच्छा दिल
                    और 
           अच्छा स्वभाव दोनो
                आवश्यक है।
    अच्छे दिल से कई रिस्ते बनेगे और 
            अच्छे स्वभाव से वो
            जीवन भर टिकेगे
💞💞🍁🎭🍁💞💞

         *✏रिश्तो की सिलाई अगर*
                 *भावनाओ से हुई है*
                 *तो टूटना मुश्किल है..*
             *और अगर स्वार्थ से हुई है,*
               *तो टिकना मुश्किल है..✍​*

Wednesday, 12 April 2017

🌴 *इच्छापूर्ति वॄक्ष* 🌴


एक घने जंगल में एक *इच्छापूर्ति वृक्ष* था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी *इच्छा* करने से वह *तुरंत पूरी* हो जाती थी। यह बात बहुत कम लोग जानते थे..क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई *हिम्मत ही नहीं* करता था।
 एक बार संयोग से एक थका हुआ *व्यापारी* उस वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गई। *जागते ही* उसे बहुत *भूख लगी* ,उसने आस पास देखकर सोचा- ' काश *कुछ खाने को मिल जाए !*' तत्काल स्वादिष्ट *पकवानों से भरी थाली* हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई। व्यापारी ने *भरपेट खाना* खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा.. *काश कुछ पीने को मिल जाए..*' तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक *शरबत* आ गए। *शरबत* पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा- ' *कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ।* हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना..जरूर इस *पेड़ पर कोई भूत* रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में *मुझे खा लेगा* ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक *भूत आया और उसे खा गया।*

इस प्रसंग से आप यह सीख सकते है कि *हमारा मस्तिष्क ही इच्छापूर्ति वृक्ष है आप जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे वह आपको अवश्य मिलेगी।* अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलतीहैं..... क्योंकि वे *बुरी चीजों की ही कामना* करते हैं। इंसान ज्यादातर समय सोचता है-कहीं बारिश में भीगने से मै *बीमार न हों जाँऊ* ..और वह *बीमार हो जाता हैं*..! इंसान सोचता है - मेरी *किस्मत ही खराब* है .. और उसकी *किस्मत सचमुच खराब* हो जाती हैं ..! इस तरह आप देखेंगे कि आपका *अवचेतन मन* इच्छापूर्ति वृक्ष की तरह आपकी *इच्छाओं को ईमानदारी से पूर्ण* करता है..! इसलिए आपको अपने मस्तिष्क में *विचारों को सावधानी से प्रवेश* करने की *अनुमति देनी चाहिए।* यदि *गलत विचार* अंदर आ जाएगे तो *गलत परिणाम* मिलेंगे। *विचारों पर काबू* रखना ही अपने *जीवन पर काबू* करने का रहस्य है..! आपके *विचारों से ही* आपका *जीवन* या तो.. *स्वर्ग* बनता है या *नरक*..उनकी बदौलत ही आपका *जीवन सुखमय या दुख:मय* बनता है.. *विचार जादूगर* की तरह होते है , जिन्हें *बदलकर* आप अपना *जीवन बदल* सकते है..! इसलिये सदा *सकारात्मक सोच* रखें .. यदि आप *अच्छा सोचने लगते है*तो पूरी *कायनात* आपको और अच्छा *देने में लग जाती है।*